शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

सर झुकाने के सौ बहाने हैं

उनके होठों से गालियाँ झरतीं,  
हमारे होठों पै तराने हैं  

चाहते, वो कहें कि ये कर दो, 
हुक्म लेने के हम दीवाने हैं  

झूठ हो, सच हो, बदगुमानी हो,
हमें, बस, हाँ में हाँ मिलाने हैं  

ख़ुद को नौकर  कहें, मगर उनका,
इसी ग़फ़लत में हम सयाने हैं  

उनके जूतों की छाँह में अपने  
शब--लज्ज़त के आशियाने हैं  

जोड़ते हाथ पत्थरों को भी,
हमारे होश क्या ठिकाने हैं  

हमारे ख़ून में ग़ुलामी है,
सर झुकाने के सौ बहाने हैं  


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अब तो मर जाने में

अब तो मर जाने में गम नहीं, अफ़सोस नहीं
मौत जो भी हो तुम, अहद-फ़रामोश  नहीं । 

जिंदगी एक बियाबां में सफ़र था लम्बा 
ना मिला साथ तो औरों का कोई दोष नहीं  

लम्बी तन्हाई जिया, अब तेरा साथ मिला 
औरों से है कमतर तेरा आगोश नहीं  

वो, जो नम  आँखों से देख रहे हैं मुझको, 
यार फ़रेबी हैं, मगर उन पै  मेरा रोष नहीं । 

होश में सेज पै काँटों के जिया मैं ताउम्र   
मैं बहुत खुश हूँ, मुझे अब रहेगा होश नहीं । 

अब तो मर जाने में गम नहीं, अफ़सोस नहीं
मौत जो भी हो तुमअहद-फ़रामोश नहीं । 

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ऊमस

कोलाहलवह  अट्टहासवह  स्मित-अपनापन, 
वह मिलना, वह चौकवहां  घंटों बतियाना,
वे  इतवार, धूप में सिकना, चाय पकौड़े,
एक हवा  के झोंके से सब बिखर गए क्या, 
या, सारे रिश्ते केवल  छिछलेसतही  थे ?  

धूप सहमकर किसी शाख पर जा  चिपकी है
श्यामल बादल थके-थके, नभ के कोनों में 
लाल हुए जा रहे विफलता की ब्रीड़ा  से 
हवा अधर पर उंगली रख कर मौन हो गयी 
यह ऊमस, बेबसी, कहाँ से  टपकी है 

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बाबा ब्लैक शीप

मेरी नन्हीं-सी पोती ने 
स्कूल से आते ही मुझसे पूछा
बाबा, बताऊँ  कुछ ?
आज मुझे स्कूल में सिखाया जो 
सुनाऊँ कुछ ?

मैंने कहा
हाँ, हाँक्यों नहीं,
क्या तुमने सीखा,
तेरी ज़ुबानी
सुनें तो सही  

थोड़ा तुतलाते हुए 
फ़िर उसने गाया    
राइम वह,  जिसने
एक नहीं, सैकड़ों
पेरेंट्स को लुभाया 

बा बा ब्लैक शीप 
हैव यू एनी वुल 
यस सर, यस सर 
थ्री बैग्सफुल
वन फॉर माय मास्टर  …        
   
राइम सुना कर वह भाग गई 
मेरी अधिविज्ञता, पर, जाग गई। 

हाँ, हाँ, बाबा ज़रूर ब्लैक शीप है। 

बरसों खा आधा पेट 
फटे कम्बल पर लेट 
उसने उगायी वुल 
तीन नहीं, पाँच नहीं
अनेकानेक  बैग्सफुल    

बक़ौल धूमिल के,

बाबा की उम्र और बोझ से 
झुकती और दुखती पीठ पर 
उसके कमाए हुए
एक नहीं, अनेक   
ऊन के हैं गट्ठर  

वह सब ग़र बेटों के लिए 
शान--शौक़त का 
सस्ता ईंधन हो,    
- जो माँगें, दे दें 
एक पाई कम हो
तो बुड्ढा चीप है 
ज़रूर ब्लैक शीप है  


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