गुरुवार, 20 मई 2021

जाति-परिचय‌

 बकरे  मिमियाते है

शेर दहाड़ते है

कुत्ते भूंकते है

गधे रेंकते हैं।


सांप फुंफकारते हैं

मेंढ़क टर्राते हैं

गवैये गाते हैं

मूरख चिल्लाते हैं।


फेसबुक पर सभी

अपनी-अपनी जात बता जाते हैं।

डाइएस्पर॔ फॉरइवर

पुरखे हमारे 

जन्मे और मरे भी वहीं

वह जमीन हमें ईश्वर ने दी थी

कुलदेवता ने

लेकर सौगंध

कि हम उसे आबाद रखेंगे

पितरों ने दी थी हमें मातृभूमि।


चिड़ियां भी चिपकी नहीं रहतीं

अपने घोंसलों से

भटकती हैं कहां नहीं

खाने की खोज में

लेकिन लौट आती हैं

शाम तक बसेरे में

हां, चिड़ियां भी।


हम नहीं घर लौटे

उस जादू की नगरी से

जहां परदेशी मेंढ़े बन जाते हैं

जादू असर करता है

पेट के रास्ते से दिलो-दिमाग पर

हमने कहा उसे अपना नया घर

कभी नहीं लौट पाए अपने घर।


हमें मिला पुरखों का अभिशाप

मा प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः

हां, वहीं, या फिर और कहीं,

भटक और कमा

वहीं सबकुछ गंवा

गज-भर ज़मीं भी न मिले 

तुम्हें मातृभूमि में

भटकती रहे अंतिम राख

अनचीन्ही हवाओं में

ढूंढती मुकाम।

मंगलवार, 18 मई 2021

तुम मेरे सपनों में आए

तुम मेरे सपनों में आए

लेकिन वह सपना लंबा था

टूट गया कुछ यादें देकर।


कल फिर तुम सपनों में आए

अपनी मैं कुछ बता रहा था

पर तुम को शायद जल्दी थी।


सोने जगने का क्रम शायद

उस मुहूर्त तक चला करेगा

जब तक सांसें रुकी नहीं हैं।


जब सो जाऊं चिरनिद्रा में

स्वप्निल आंखों में आ जाना

तब जाने की बात न करना।


ओ मेरे सपनों के साथी

मेरे ये सपने अपने हैं

ये तेरे मेरे सपने हैं।

सोमवार, 17 मई 2021

सुनो और जानो

सुनो और जानो

कि मैं भी तुम्हारी तरह

हाड़-मांस का बना सचेतन पुतला हूं

मुझे भी चाहत थी

कि गुलाबों की बगिया में बच्चों के साथ खेलूं।

सुनो और जानो

कि तुम्हारी खुशहाली के लिए 

मैंने मन्नतें मांगी

परिस्थिति देवी को खुश करने को

कितने बलिदान दिये

अपने सपनों के, अरमानों के।

अपने आंसुओं की हर बूंद को

आशा और कामनाओं की सीप में संजोया

कि वे मोती बनकर तेरे काम आयें।

लेकिन ये सब

बीती बातें हैं

छोड़ो, कुछ और कहो,

आये हो मिलने

बहुत दिनों पर।   

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा

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माँ सरस्वती, विद्यादायिनि,

किसी  तरह डिग्री दिलवा दे

पर पढ़ने से साफ बचा ले

हर वसंतपंचमी दिवस पर

पूजन अर्चन किया  करूंगा 

डीजे के उद्दाम लयों पर

बेसुध नर्तन किया करूंगा 

मूर्ति विसर्जन करके तेरी 

जी भर दारू पिया करूंगा ।

कर दे थोड़ी कृपा, शारदे 

किसी तरह डिग्री दिलवा दे

आजीवन गुणगान करूंगा ।

रविवार, 12 जुलाई 2020

हताशा

साठ वर्षों से सुनता आया हूं

नेताओं  के मनमोहक वादे
खुशफहम इरादे

उनकी जीत के नगाड़े
उनकी प्रीत के पहाड़े

उनके नेम एन्ड फेम
उनके हथकंडे और स्कैम।

हम बस टापते रह गये
शिशिर में कांपते रह गये
अपने अरमानों की अर्थी पर
फटा कफ़न ढांकते रह गये।

सोमवार, 6 जुलाई 2020

पर्यावरण पाखंड







क्या होते हैं सर्पदंश के भयावह परिणाम
यह अटारियों पर बैठी, बाल सुखाती, 
बहू जी से नहीं
उस बाप से पूछो
जिसका बेटा सांप काटे मरा
या उस बेवा से पूछो
जिसकी मांग का सिंदूर
चाट गयी नागिन।
लोहे का स्वाद लुहार से नहीं,
उस घोड़े से पूछो
जिसके मुंह में लगाम है।

इसे न मारो
उसे न मारो
अभयारण्य में दामाद बनाकर रखो
बाघ ने मजदूर को खा लिया
बाघ की पीठ थपथपाओ
अच्छा किया, शाबाश मेरे शेर,
वह जंगल उजाड़ता मजदूर
कितना बदमाश था
अच्छा किया तुमने उसकी बोटियां चबाकर।

प्रकृति का संतुलन  मत बिगाड़ो।
कौन बिगाड़ता है प्रकृति का संतुलन?
प्रकृति गुड़िया है न,
मानव के हाथों का खिलौना।
डायनोसोर ने कौन संतुलन बिगाड़ा था?
कितने वैज्ञानिक थे डायनोसोर?

प्रकृति का इतिहास पढ़ो
प्रकृति घरोन्दे बनाती  है
बिगाड़ती है
और फिर बनाती है नये घरोन्दे।

मानव नहीं रहेगा कल
क्यों रहे?
क्यों कोई और जीव सफल नहीं हो आत्मरक्षण के युद्ध में?
बाघ और सांप बचा लेंगे मानव को?
बचा भी लें तो
उनकेे संवारे भविष्य की
क्या होगी रूपरेखा?

भूं-भां पंडितों
सोचो इसपर
अभी भी समय है।