गुरुवार, 3 जून 2021

चलो हो गई खत्म कहानी

 इस तट घर में मैं रहता था

उस तक घर में वह रहती थी

बीच भरी गंगा बहती थी।


एक दिन मैंने उसको देखा

उस दिन उसने मुझको देखा

चारों आंखें कुछ कहती थी।


उसने कहा इधर आ जाओ

मैंने कहा इधर आ जाओ

उसने कहा, पहल तेरी हो।


फिर मैं उसको घर ले आया

उसको कितनी सुंदर पाया

जैसे हो मरुथल में छाया।


फिर ऊसर में बाग लगाया

फूल खिले, मलयानिल आया

सबने मिलकर गाना गाया।


एक दिन ऐसा तूफां आया

कौन कहां किस ओर फिंकाया

शव-ही-शव सड़कों पर पाया।


उड़ी गगन में बन बेगानी

बची याद ही एक निशानी

चलो, हो गई खत्म कहानी।

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