मंगलवार, 29 जुलाई 2014

मत करो किसी का इंतज़ार


शिशिर-शीर्ण निष्पर्ण वृन्त
बिखरे, वीणा के भग्न तार
खँडहर अतीत प्रासादों के
किसका, क्यों, करते इंतज़ार ?

हो किसी विजन प्रांगण में स्थित 
चिर-स्वप्निल प्रेमी की मज़ार
धूसरित, उपेक्षित, खग-विष्ठित,
किसका, क्यों, करते इंतज़ार ?

दूध-से धवल ज्योत्स्ना-शीतल 
एक  मसृण दुपट्टे में  सँवार
आएगी कोई दीप लिए 
करते क्या  उसका इंतज़ार ?

भूल जा, दोस्त,  भ्रम छोड़, यार,
शब्दाडंबर हैं, स्नेह, प्यार,
तुम हो अतीत, तुम हो विराम,
मत करो किसी का इंतज़ार  

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